Keladi Rameshwara Temple – केलाडी रामेश्वर मंदिर – अपनी तरह की अनूठी वास्तुकला का साक्षी

Keladi Rameshwara Temple – कर्नाटक को मंदिरों के शहर के रूप में जाना जाता है, यहाँ हर मंदिर की अपनी अनूठी वास्तुकला शैली है।

ऐसा ही एक मंदिर है केलाडी रामेश्वर मंदिर ( Keladi Rameshwara Temple )

Keladi / केलाडी शिमोगा जिले का एक गाँव है जो अपने समृद्ध अतीत और संस्कृति के लिए जाना जाता है। ( केलाडी शब्द का अर्थ है मित्र )।

आज के टाइम पर केलाडी एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर दो लोकप्रिय आकर्षणों हैं

  • केलाडी रामेश्वर मंदिर ( Keladi Rameshwara Temple ) और
  • केलाडी संग्रहालय ( Keladi Museum)

अब पुरातत्व विभाग इन दोनों ऐतिहासिक धरोहर की देखभाल करते हैं।

Keladi Rameshwara Temple – केलाडी रामेश्वर मंदिर वीडियो

अगर आप जल्दी में हैं तो यह विडिओ देखिये

Keladi / केलाडी शहर की कहानी

१६ वी -१७वी शताब्दी में कभी यह शहर केलाडी शासकों की राजधानी थी, जिसे केलाडी नायक भी कहा जाता था, जो विजयनगर साम्राज्य का एक सामंतथे ।

तालीकोटा की लड़ाई में विजयनगर साम्राज्य के टूटने के बाद, केलाडी नायक ने एक स्वतंत्र राज्य का गठन किया और यह तब तक बना रहा जब तक कि हैदर अली द्वारा कब्जा नहीं कर लिया गया।

Keladi Rameshwara Temple

एक अद्भुत वास्तुकला है केलाडी के रामेश्वर मंदिर की , जो की भगवान रामेश्वर को समर्पित है जिसमे तीन शैलियों होयसला, द्रविड़ियन और कदंब का बेहतरीन उदाहरण देखने को मिलता है।

इस देव स्थान में पार्वती, रामेश्वर और वीरभद्र को समर्पित तीन मंदिर हैं।

पार्वती मंदिर में नक्काशीदार लकड़ी के खंभे दिखाई देते हैं जो शानदार हैं।

वीरभद्र मंदिर के मंडप में छत सबसे अलंकृत है, जिसमें एक भव्य नक्काशीदार दृश्य है जिसमें गंधभेरुंडा (एक दो सिर वाला पौराणिक पक्षी) है, जिसमें प्रत्येक चोंच में एक शेर और प्रत्येक पंजे में एक हाथी है, दिखयी बढता है ।

एक लंबा पत्थर का स्तंभ – यानि दीपस्तंभ – परिसर में मौजूद है।

गांव के संग्रहालय में केलाडी नायक से संबंधित पुराने युग की कलाकृतियों और अन्य स्मृति चिन्हों का एक प्राचीन संग्रह है।

चालुक्य और होयसल काल की समृद्ध विरासत को दर्शाते हुए कई मूर्तियाँ, मूर्तियां, तांबे के शिलालेख, सिक्के और ताड़ के पत्ते भी हैं।

भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर बाहर से मंदिर देखने में बहुत ही साधारण लगता है।

लेकिन आप जैसे ही अंदर जाते हैं इसकी सुंदता देखते ही बनती है।

आप देखगे कि खंभे लकड़ी के बने हुए हैं। शिव मंदिर के साथ-साथ एक पार्वती मंदिर है जिसमें चंदन की लकड़ी से बनी बहुत ही सुंदर छत की नक्काशी है।

चौदप्पा नायक, जिन्होंने इन मंदिर का निर्माण किया था, उनका इस युग में मंदिर वास्तुकला को बढ़ने में बड़ा योगदान है।

मंदिर के भीतर की संरचनाएं हिंदू पौराणिक कथाओं के कई देवताओं, कमल और पत्तियों जैसे फूलों के रूप को दर्शाते हैं इसके अलावा पूजा से आवश्यक अन्य वस्तुओं को भी चित्रित करती हैं।

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