Akshaya Tritiya

Akshaya Tritiya 2021 – Date, time, mantra, wishes, quotes

Akshaya Tritiya 2021: Also called as Akha Teej is considered very auspicious. This festival is celebrated on Tritiya Tithi of Shukla Paksha of Vaishakh month. It is a very important festival in Hinduism.

Akshaya Tritiya 2021 Date and Time

This year, in 2021, Akshaya Tritiya is being celebrated on 14 May 2021, Friday

Akshaya Tritiya Muhurt

Tritiya Start Time: 05.40 AM (14 May 2021)

Tritiya ends on: 12.18 PM ( (14 May 2021 )

Auspicious time to buy gold: 14 May 2021, 5.40 AM to 15 May 2021, 5.30 AM

Pooja timings: 05.40 AM (14 May 2021) to 12.18 PM ( (14 May 2021 )

Importance of Akshaya Tritiya

This festival is of great importance in Hindu religion. Lord Vishnu is worshiped on this day.

According to religious beliefs, on this day Lord Parashurama, the incarnation of Lord Vishnu was also incarnated on the earth.

Therefore, this day is also celebrated as Parashuram Jayanti.

On the same day, MaGanga also came to earth from heaven. On this day all the auspicious works including marriage, upanayana, house warming etc are considered auspicious.

If you are planning to go anywhere, every Muhurta of this day is considered auspicious.

Hence on this day, worship of Lord Vishnu is considered to be particularly fruitful.

It is said that worshiping Ma Lakshmi along with worship of Lord Vishnu on this day, is considered very fruitful.

It is said that the worshiper on this day goes to Vaikunth (adobe of Lord Vishnu) after enjoying the pleasures of this world.

Apart from this, chanting of mantras of Lord Vishnu on this day is also considered very good.


Lord Vishnu Mantra

Recite below lord Vishnu Mantra

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।
ॐ नारायणाय विद्महे।
वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णु प्रचोदयात्
ॐ विष्णवे नम:
ॐ हूं विष्णवे नम:

Lord Vishnu

Ma Lakshmi Mantra

ॐ आध्य लक्ष्म्यै नम ,

ॐ विद्या लक्ष्म्यै नम: ,

ॐ सौभाग्य लक्ष्म्यै नम: ,

ॐ अमृत लक्ष्म्यै नम:

Goddess Lakshmi

It is believed that on this day people must donate some of their earnings for religious works. By doing this, their wealth will increase.

But do you know which items we should donate on this day?

Items to donate on Akshaya Tritiya

On this day, donating cold things like water-filled pitcher, ax, fan, umbrella, rice, melon, cucumber, sugar, sattu etc. is considered very good.

What to buy on Akshaya Tritiya

If you want to buy something for your fortune on this auspicious day, then buy these things like – gold, silver, ceramics, silk garments, sarees, rice, turmeric, flower plant and conch.

How to invest in gold online during this Akshaya Tritiya

Due to coronavirus impact this year we are in lock down and hence shops are closed. But there is still a way to buy gold if you are looking for one.

  1. Buy Sovereign Gold Bond at any of the commercial banks selling SGB bonds
  2. Buy Gold ETF from any demat account
  3. Offers from various established e-commerce players like Tanishq who are selling gold certificates which can be exhanged with physical gold once the shops after lockdown is lifted.

Donating on this day increases ones fortune. Today, if a donation of jaggery, grains, fruits, vegetables, clothes, etc. is done with a pure mind, then it is recognized to get its benefits as a virtue.

On this day, if the bread made from jaggery is fed to the cow and the water mixed with jaggery is fed to Gomata, then you get fame and fortune.

Akshaya Tritiya Puja Vidhi

  • Get up early in morning. If possible in Brahama Muhurat
  • While taking bath, please add few drops of ganga jal.
  • Install the idol of Lord Vishnu and mother Lakshmi in the place of worship .
  • Take a vow (sankalp) to observe the fast today.
  • Get the statue bathed with panchamrit
  • Offer flowers and garlands to the statue
  • Offer barley sattu, gram dal, barley and fruits
  • Read Vishnu Sahasranama today
  • Perform Aarti by offering Tulsi Dal
  • Donate to Brahmins

Akshaya Tritiya Wishes (messages)

May this Akshaya Tritiya Bring you prosperity and joy. Wish you a very Happy Akshaya Tritiya.

May this be the new beginning of greater prosperity, success, and happiness. Happy Akshaya Tritiya.

May you witness tremendous luck and good fortune. Wish you a very happy Akshaya Tritiya.

May this Akshaya Tritiya, light up for you. The hopes of happy times and dreams for a year full of smiles! Wishing you a very Happy Akshay Tritiya.

May this Akshay Tritiya Bring you prosperity and joy. Wish you a very Happy Akshay Tritiya.

May This Akshaya Tritiya, Light Up for You – The Hopes of Times and Dreams for a Year Full of Smiles!

May Lord Vishnu Bless You with Wealth and Prosperity on this auspicious occasion.

May this Akhaa Teej brings the hope of happy times for You and Your Family!

May This Akshaya Tritiya, Light Up for You – The Hopes of Times and Dreams for a Year Full of Smiles!

May Lord Bless You on This Auspicious Day of Akshaya Tritiya, and May It Be a New Beginning of Greater Prosperity, Success and Happiness.

Akshaya Tritiya Wishes

इस अक्षय तृतीया भगवान की कृपा आप पर बनी रहे आपको जीवन में सारी खुशियां मिलें
आपके जीवन में कभी कोई दुख न आए अक्षय तृतीया की ढेर सारी शुभकामनाएं

लक्ष्मी जी कृपा आप और आपके परिवार पर बनी रहे .

दिनों दिन बढ़ता जाए आपका कारोबार, परिवार में बना रहे स्नेह और प्यार।
होती रहे सदा आप पर धन की बौछार, ऐसा हो आपका अक्षय तृतीया का त्यौहार।
अक्षय तृतीया की हार्दिक शुभकामनाएं

मां लक्ष्मी अपने कुमकुम लगे कदमों से आपके घर आए आपको एवं आपके परिवार को अक्षया तृतीया की शुभकामनाएं

आपके घर में धन की बरसात हो लक्ष्मी का वास हो संकटों का नाश हो शांति का वास हो


Dear friends, Happy Akshaya Tritiya once again. May this Akshaya Tritiya brings you lots and lots of joy.

ॐ विष्णवे नम:!

 1,048 total views,  1 views today

Hanuman Jayanti 2021

Hanuman Jayanti 2021 – हनुमान जयंती २०२१

भगवान हनुमान आज भी पृथ्वी पर वास करते हैं। यह कहा जाता है कि हनुमान जी को चिरंजीव होने का आशीर्वाद प्राप्त है। हनुमानजी सूर्यपुत्र और भगवान शिव के अंशावतार है। Hanuman Jayanti 2021 जो की भगवान हनुमान जी का जन्म दिवस है , भगवान हनुमान के भक्तों के लिए एक बड़ा दिन है।

प्रतिवर्ष चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जयंती या हनुमान जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस बार हनुमान जयंती 27 अप्रैल 2021 को मनाई जाएगी।

इस तिथि के अलावा कई जगहों पर यह पर्व कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भी मनाई जाती है।

इस दिन बजरंगबली की पूजा-अर्चना करने से मनुष्य को सभी तरह के कष्टों और भय से मुक्ति मिलती है। हनुमान जी अपने भक्तों की हर संकट से रक्षा करते हैं।  

हनुमान भक्त हनुमान जयंती का वर्षभर पूरे उत्साह से इंतजार करते हैं और बड़े भक्ती भाव के साथ मनाते हैं इस पावन पर्व को ।


Check out these powerful Lord Hanuman Yantra:


Hanuman Jayanti 2021 हनुमान जयंती 2021 का शुभ मुहूर्त:

चैत्र माह, शुक्ल पक्ष, पूर्णिमा तिथि

27 अप्रैल, मंगलवार

hanuman jayanti date

पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ– 26 अप्रैल 2021, सोमवार, दोपहर 12 बजकर 44 मिनट से

पूर्णिमा तिथि का समापन- 27 अप्रैल 2021, मंगलवार, रात 9 बजकर 01 मिनट पर 

Hanuman Jayanti 2021 हनुमान जयंती 2021 का महत्व

हनुमान जयंती हिंदू धर्म का बहुत ही खास पर्व है। इस दिन मंगलवार भी पड़ रहा है। ऐसे में यह तिथि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

इस दिन हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को जीवन में संकटों से मुक्ति और सुख शान्ति की प्राप्ति होती है।

अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि ग्रह का अशुभ प्रभाव होता है तो उसे विधिपूर्वक हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए।

इससे शनि देव से जुड़ी समस्याएं भी दूर हो जाती हैं। साथ ही नकारात्मक ऊर्जा, भूत-प्रेत बाधा जैसी परेशानियों से भी मुक्ति मिल जाती है।

इस दिन हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ अवश्य करना चाहिए। इससे हनुमान जी जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं

Hanuman Jayanti – पूजन सामग्री

हनुमान जयंती के दिन भगवान हनुमान की पूजा विधि-विधान से करना शुभ माना जाता है।

इसीलिए पूजा के लिए पूजन सामग्री जैसे

  • एक चौकी,
  • एक लाल कपड़ा,
  • हनुमान जी की मूर्ति या फोटो,
  • अक्षत,
  • घी से भरा दीपक,
  • ताजे फूल,
  • चंदन या रोली,
  • गंगाजल,
  • तुलसी की पत्तियां,
  • धूप,
  • नैवेद्य (गुड और भुने चने )

भगवान हनुमान की पूजा विधि

हनुमान जी का जन्म सूर्योदय के समय हुआ था, इसलिए हनुमान जयंती के दिन ब्रह्म मुहूर्त में पूजा करना अच्छा माना गया है

घर की साफ-सफाई करने के बाद गंगाजल छिड़क कर घर को पवित्र कर लें। स्नान आदि के बाद ही हनुमान जी के मंदिर या घर पर पूजा करनी चाहिए।

इसके बाद हनुमान जी को ध्यान कर हाथ में गंगाजल लेकर व्रत का संकल्प करें।

एक चौकी पर अच्छी तरह से लाल कपड़ा बिछा दें।

चौकी पर हनुमान जी की मूर्ति या फोटो लगाएं।

ध्यान रखना चाहिए कि कोई भी पूजा भगवान गणेश को सर्वप्रथम नमन किए बिना पूरी नहीं होती है।

पूजा के दौरान हनुमान जी को लाल सिंदूर और चोला अर्पित करना चाहिए। मान्यता है कि चमेली का तेल अर्पित करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं।

साथ ही सभी देवी-देवताओं को जल और पंचामृत अर्पित करें। अब अबीर, गुलाल, अक्षत, फूल, धूप-दीप और भोग आदि लगाकरउनकी वंदना करें।

इससे बाद दीपक और धूप जला कर आरती करे

हनुमान जयंती पर हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और हनुमान आरती करना शुभ माना जाता है।.

विनम्र भाव से बजरंग बली की प्रार्थना करें और आरती के बाद प्रसाद वितरित करें।

पूजा विधि में कोई कमी न रह जाए इसका धयान रखना जरुरी है साथ ही पूजा करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

हनुमान जी की पूजा करते समय जाने-अनजाने की गई गलतियों के कारण बजरंग बलि जी नाराज ना हो इसका धयान रखे और इन कामों को करने से बचना चाहिए।

  • जो लोग हनुमान जी के उपासक हैं उन्हें हनुमान जयंती के दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • इसके अलावा इस दिन जो वस्तु दान की जाती है उसका सेवन स्वयं नहीं करना चाहिए
  • हनुमान जयंती के दिन भूलकर भी मांस मदिरा का सेवन न करें।
  • इसके साथ ही इस दिन किसी भी प्रकार की नशीली चीजों का सेवन न करें। अन्यथा आपको हनुमान जी के क्रोध का भागी बनना पड़ सकता है।
  • हनुमान जयंती पर बिलकुल भी क्रोध न करें और न ही किसी को अपशब्द कहें।
  • इस बात का खास ध्यान रखें कि पूजा करते समय तो एकदम शांत स्वभाव रखें। यदि आपको किसी कारण से क्रोध आ रहा हो तो उस समय अशांत मन से हनुमान जी की पूजा न करें।
  • हनुमान जयंती पर पूजा करते समय कभी भी काले या फिर सफेद रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए।
  • इस दिन लाल या पीले रंग के कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए और हनुमान जी को लाल फूल, लाल वस्त्र अर्पित करने चाहिए। काले रंग के कपड़े पहनकर भूलकर भी पूजा न करें। इससे नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • हनुमान जी ब्रह्मचारी हैं इसलिए इनकी पूजा में करने वाले को भी ब्रह्मचार्य का पालन करना चाहिए।
  • माना जाता है कि स्त्रियों को पूजा करते समय हनुमान जी की मूर्ति को स्पर्श नहीं करना चाहिए।

Hanuman Jayanti 2021 – भगवान हनुमान मंत्र

हनुमान स्तुति मंत्र

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं। 
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।। 
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं। 
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।

हनुमान स्त्रोत

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं।
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं।
रघुपतिप्रियभक्तं वातात्मजं नमामि।।
यत्र यत्र रघुनाथकीर्तनं तत्र तत्र कृतमस्तकांजलिम।
वाष्पवारिपरिपूर्णालोचनं मारुतिं नमत राक्षसान्तकम्।।

राशि के अनुसार मंत्र

मेष: ॐ सर्वदुखहराय नम:
वृषभ: ॐ कपिसेनानायक नम:
मिथुन: ॐ मनोजवाय नम:
कर्क: ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नम:
सिंह : ॐ परशौर्य विनाशन नम:
कन्या : ॐ पंचवक्त्र नम:

तुला: ॐ सर्वग्रह विनाशिने नमः
वृश्चिक: ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे नम:
धनु: ॐ चिरंजीविते नम:
मकर: ॐ सुरार्चिते नम:
कुंभ: ॐ वज्रकाय नम:
मीन: ॐ कामरूपिणे नम:


भीड़ पड़ी तेरे भक्तों पर बजरंगी, सुन लो अर्ज़ अब तो दाता मेरी।
हे महावीर अब तो दर्शन दे दो., पूरी कर दो तुम कामना मेरी।


Hanuman Ji Ki Aarti हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।

अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।

दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।

लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।

लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।पैठी पताल तोरि जमकारे।

अहिरावण की भुजा उखाड़े। बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे।

जै जै जै हनुमान उचारे।कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई।

तुलसीदास प्रभु कीरति गाई। जो हनुमानजी की आरती गावै।

बसी बैकुंठ परमपद पावै।आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।


राम का हूं भक्त मैं रूद्र का अवतार हूं, अंजनी का लाल हूं मैं दुर्जनों का काल हूं
साधुजन के साथ हूं मैं निर्बलो की आस हूं, सद्गुणों का मान हूं मैं हां मैं वीर हनुमान हूं
हनुमान जयंती की सभी भक्तों को प्रणाम

JAI BAJRANG BALI KI !

you may also like: Hanuman Chalisa – Hanuman Chalisa Lyrics

 1,259 total views

Navratri Day 9 - Ma Siddhidatri

Navratri Day 9 – Ma Siddhidatri – माँ का नौवां स्वरुप – माँ सिद्धिदात्री

Navratri Day 9 is dedicated to Ma Siddhidatri.

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

Navratri Day 9 -  Ma Siddhidatri

चैत्र नवरात्रि से हिंदू नववर्ष का भी प्रारंभ होता है, इसलिए चैत्र नवरात्रि से नवशुरुआत भी माना जाता है। इस नवरात्रि का अंत राम नवमी पर होता है, जिस दिन मर्यादा पुरषोत्तम श्री राम का जन्म दिवस माना जाता है

Hindu New Year begins with Chaitra Navaratri, hence Navratri is also considered to be start of new year and new begining. The end of this Navratri ends on Rama Navami, the day which is considered to be the day on which Maryada Purushottam Lord, Shri Ram was born !

चैत्र नवरात्रि के आखिरी दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी। पुराणों की अनुसार माता सिद्धिदात्री की उपासना स्वयं देवों के देव महादेव शिव भी करते हैं।

On the last day of Chaitra Navratri, Mata Siddhidatri, the ninth form of Maa Durga, is worshiped. According to the Puranas, Goddess Siddhidatri is also worshiped by Lord Shiva, the Lord of Gods himself.

माता आदि- शक्ति , सर्वोच्च देवी, भगवती शिव के बाएं आधे भाग से सिद्धिदात्री के रूप में प्रकट हुईं। माता सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियाँ प्रदान करती हैं।

यहां तक ​​कि भगवान शिव ने भी माता सिद्धिदात्री की मदद से अपने सभी सिद्धियों को प्राप्त किया था। माता सिद्धिदात्री की पूजा केवल मनुष्य ही नहीं बल्कि देव, गंधर्व, असुर, यक्ष और सिद्ध भी करते हैं।

जब माता सिद्धिदात्री शिव के बाएं आधे भाग से प्रकट हुईं, तब भगवान शिव का नाम अर्ध नारीश्वर पड़ा।

माता सिद्धिदात्री कमल के आसन पर विराजमान हैं।मार्कण्डेय पुराण के अनुसार सिद्धियाँ आठ प्रकार की मानी गयी हैं माँ के इस सवरुप की पूजा के साथ ही नौ दिन के नवरात्र के आ नुष्ठान की समाप्ति होती है

Ma Siddhidatri – माता सिद्धिदात्री का रूप 

माता सिद्धिदात्री कमल पुष्प पर विराजमान है और चार भुजा धारी वाली माँ ने लाल वस्त्र धारण किए हुए हैं।

इनके हाथों में सुदर्शन चक्र, शंख, गदा और कमलपुष्प रहता है। इनके सिर पर बड़ा और ऊंचा सा स्वर्ण मुकूट और मुख पैर मंद मंद सी मुस्कान एकक अनोखी आभा को दर्शाता है

Ma Siddhidatri की उत्पति से जुड़ी कथा

माँ दुर्गा प्रतिपदा से लेकर नवमी तिथि तक दानवो का नाश करती है जिससे देवताओ के सभी भय दूर हो जाते है अतः नौवे दिन माँ का स्वरूप दानवो के अंत के बाद अपने भक्तो के मनरत सिद्ध करने के लिए है।

माँ को आदि शक्ति कहा जाता है

मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए रोजाना पुष्प अर्पित करें। उन्हें लाल रंग के पुष्प बहुत पसंद हैं।

Ma Siddhidatri के बाएं हाथ में शंख और अस्त्र-शास्त्र हैं तो दाहिने दाहिने हाथ में गदा और चक्र हैं ।

सवारी / बाहन: शेर.बैंगनी रंग

Ma Siddhidatri पूजा विधि

नाहा धो करके साफ सुथरे वस्त्र धरण करना चाहिए , उसके बाद चौकी पे गंगाजल से शुद्ध करके मां की तस्वीर या मूर्ति रखें। 

माँ को लाल रंग की चुनरी अर्पित करें !

रोली।चावल कुमकुम केसर से तिलक और अन्य श्रंगार करे

  • इस दिन दुर्गासप्तशती के नवें अध्याय से माता का पूजन करें। 
  • इसके बाद मां की आरती और हवन करना चाहिए। 
  • हवन करते समय व्यक्ति को सभी देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए। 
  • इस दिन देवी सहित उनके वाहन, सायुज अर्थार्त अस्त्र, शस्त्र, योगनियों एवं अन्य देवी देवताओं के नाम से हवन करना चाहिए।

पूजा के दौरान मां के बीज मंत्र का 108 बार जाप करें। 

भगवान शंकर और ब्रह्मा जी की पूजा करें फिर मां की अराधना करें। 
माता सिद्धिदात्री को मिष्ठान और फल का प्रसाद चढ़ाएं। 

फिर माता सिद्धिदात्री का नाम लेना चाहिए और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद ले।

माँ की स्तुति करने वाले मनुष्यो का निरवान चक्र जागृत होता है। माँ अपने भक्तो के कार्य सुगम और सरल करती है। वह सारे सुखो को भोग कर अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है

मां सिद्धिदात्री की आरती/Maa Siddhidatri Ki Aarti

जय सिद्धिदात्री मां, तू सिद्धि की दाता।

तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता।

तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि।

तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।

कठिन काम सिद्ध करती हो तुम।

जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम।

तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है।

तू जगदम्बे दाती तू सर्व सिद्धि है।

रविवार को तेरा सुमिरन करे जो।

तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो।

तू सब काज उसके करती है पूरे।

कभी काम उसके रहे ना अधूरे।

तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया।

रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया।

सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली।

जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली।

हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा।

महा नंदा मंदिर में है वास तेरा।

मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता।

भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता।


|| जय माता की ||

 778 total views

navratri day 8 - ma gauri

Navratri Day 8 – Ma Gauri Aarti: मां दुर्गा का आठवां स्वरुप माँ गौरी

Navratri Day 8 – Ma Gauri Aarti: माँ दुर्गाजी की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। नवरात्री के आठवें दिन महागौरी की उपासना का विधान है।

इनकी उपासना महाफलदायी है। जो भक्तगण सच्चे मन से इनकी स्तुति वंदना करते है उन्हें  अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती है

मां गौरी का रूप बेहद सुन्दर और मोहक है। इनका वर्ण गौर है इनकी आयु आठ वर्ष की मानी गयी है माँ के समस्त वस्त्र और गहने श्वेत है महागौरी की चार भुजाएं हैं।

इनका वाहन वृषभ है। इनके दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपरवाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे के बाएं हाथ में वर-मुद्रा हैं। इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है।

Navratri Day 8 – Ma Gauri Shlok – माँ गौरी श्लोक

महागौरी की आराधना निम्न मंत्र से करने से शुभ फल की प्राप्त होते हैं

वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।

सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्॥

श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः | महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा ||

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

Navratri Day 8 Katha – Ma Gauri Katha – माँ गौरी की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार माँ पारवती ने भगवान शिव को पति के रूप पाने के लिए कठोर तपस्या की थी इस कठोर तपस्या से उनके शरीर का रंग कला पड़ गया।

देवी की ऐसी कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान उन्हें स्वीकार किया और उनके शरीर को पवित्र गंगाजल से धोकर कांतिमान बना दिया , और इस तरह से माँ गौरी की काया अत्यंत कांतिमान हो उठी ,तभी से इनका नाम गौरी पड़ा।

देवी के इस रूप की प्रार्थना करते हुए देव और ऋषिगण कहते हैं “सर्वमंगल मंग्ल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके. शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते..”

एक अन्य कथा भी प्रचलित है इसके जिसके अनुसार, एक सिंह काफी भूखा था, वह भोजन की तलाश में वहां पहुंचा जहां देवी उमा तपस्या कर रही होती हैं।

देवी को देखकर सिंह की भूख बढ़ गयी परंतु वह देवी के तपस्या से उठने का इंतजार करते हुए वहीं बैठ गया। इस इंतजार में वह काफी कमज़ोर हो गया।

देवी जब तप से उठी तो सिंह की दशा देखकर उन्हें उस पर बहुत दया आती है और माँ उसे अपना सवारी बना लेती हैं क्योंकि एक प्रकार से उसने भी तपस्या की थी।

इसलिए देवी गौरी का वाहन बैल और सिंह दोनों ही हैं।

Navratri Day 8 pooja vidhi – Ma Gauri ki Pooja Vidhi – माँ गौरी की पूजन विधि

अष्टमी के दिन महिलाएं अपने सुहाग के लिए देवी मां को चुनरी और श्रृंगार के वस्तुए भेंट करती हैं उनसे अपने पति और घर परिवार सुख सौभयग्य की याचना करती हैं

Ma Gauri ki Pooja ka Mahtwa – माँ गौरी की पूजा का महत्व

माँ महागौरी का ध्यान, स्मरण, पूजन-आराधना भक्तों के लिए  बड़ा ही शुभ और कल्याणकारी  है मां महागौरी की उपासना से भक्तों के सारे कष्ट दूर होते है अतः इनके चरणों में अपना शीश झुका कर अपने लिए सुख-समृद्धि की   प्राथना करे।

महागौरी का पूजन-अर्चन, उपासना-आराधना कल्याणकारी है। इनकी कृपा से अलौकिक सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं।

महागौरी का मंत्र  

  • मां महागौरी मंत्रः ओम महागौरियेः नमः, इस मंत्र का 108 बार जाप करें। 
  • आठवें दिन का रंगः गुलाबी रंग 
  • आठवें दिन का प्रसादः मिठाई जैसे मलाई बर्फी, पेडा, रसमलाई, एवं दूध व फल से निर्मित मिठाई 

Ma Gauri Aarti: नवरात्रि के सातवें दिन मां महागौरी की आरती

जय महागौरी जगत की माया ।
जया उमा भवानी जय महामाया ।।
 
हरिद्वार कनखल के पासा ।
महागौरी तेरा वहां निवासा ।।
 
चंद्रकली ओर ममता अंबे ।
जय शक्ति जय जय मां जगदंबे ।।
 
भीमा देवी विमला माता ।
कौशिकी देवी जग विख्याता ।।
 
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा ।
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा ।।
 
सती ‘सत’ हवन कुंड में था जलाया ।
उसी धुएं ने रूप काली बनाया ।।
 
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया ।
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया ।।
 
तभी मां ने महागौरी नाम पाया ।
शरण आनेवाले का संकट मिटाया ।।
 
शनिवार को तेरी पूजा जो करता ।
मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता ।।
 
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो ।
महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो ।।


For all festivals related posts – click here

 1,462 total views

Haridwar Kumbh Mela 2021

Haridwar Kumbh Mela 2021

Friends welcome to Haridwar Kumbh Mela 2021. Kumbh Mela is a holy occasion for the Hindu’s of India.

The last Kumbh in Haridwar was held in 2012 and was supposed to be held in 2022, but it has been preponed. This has happened first time in 100 years.

This happened due to the calculation of auspicious dates and not due to Corona.

Haridwar Kumbh Mela 2021 Dates

Kumbh in Haridwar begins on 14th January, but the first Shahi Snan is due to happen on the 11th of March 2021 and go on till the 26th of April.

Though Kumbh is held in four places in India, at Haridwar, Allahabad, Ujjain, and Nashik. This year it is happening in Haridwar.

Registrations will be required beforehand.

14/01/21Makar SankrantiSnan
11/02/21Mauni AmavasyaSnan
16/02/21Basant PanchamiSnan
27/02/21Maghi PoornimaSnan
11/03/21Maha ShivratriShahi Snan
12/04/21Somvati AmamvasyaShahi Snan
13/04/21Chaitra Shukla PratipadaSnan
14/04/21BaisakhiShahi Snan
21/04/21Ram NavamiSnan
27/04/21Chaitra PurnimaShahi Snan

Who started the Kumbh Mela?

In the 18th century, a Maratha ruler known as Ranoji Shinde began this holy festival. It was a local festival in the beginning.

He had invited Ascetics from Nashik to Ujjain. It was celebrated to enhance the Hindu religion and unite all the religious people in one place so that they could meet and understand each other better.

Why is Kumbh Mela celebrated?

The Kumbh Mela is a spiritual event. It is a mesmerizing experience. It is the largest religious gathering in the world.

This is a place where Hindu men and women come together for the holy dip in the river Ganga and also discuss about their faith in the religion.

There are prayers all day and night. The atmosphere is so divine. One is enriched spiritually by merely being present at the venue. There is so much to learn and understand at the Kumbh Mela.

What is the legend behind Kumbh Mela?

Kumbh is derived from the word pot or pitcher. It is related to the pot of Amrit in this case. This is a pot of nectar that can make a man immortal and remove all his sins.

This was the elixir of life. On Samudra Manthan, there was some spillage of this nectar. It is believed to have fallen here in Haridwar as well.

So a dip in the holy river at this auspicious time is believed to remove all the sins and make your soul pure.

Which god is worshipped in the Kumbh Mela?

During the Samudra Manthan, the first thing to come out was poison. It was all drunk by Lord Shiva to save all the creatures of this world.

He is known as Neel Kanth for this reason. So if Lord Shiva would not have finished the pot of poison there would have not been any pot of elixir.

Each and every akhara worships Lord Shiva though some do worship Lord Vishnu as well.

The first Kumbh Mela was held in which year?

The first Kumbh Mela was celebrated in the year 1870 at Allahabad. Though it was scheduled to be held in the year 1958 due to the uprising disturbances, no Mela was held.

What is the meaning of the word Kumbh?

There are various meanings of this word. But in the Hindu, Jain, and Buddhist context it means pot or womb. It is known to represent the life, fertility, and sustenance or purity of humans.

Haridwar Kumbh Mela 2021 restrictions due to COVID

So Will there be any restrictions due to the current COVID situation?

Yes in the current situation there are restrictions bound to be in place. Though Kumbh is a Mela where one and all are allowed to attend, this year it will be different.

As in the past years, there have been a huge number of devotees thronging the place at the same time. The government has come up with the idea of limiting the devotees each day.

The Chief Minister of Uttrakhand had said that they will be issuing passes to the devotees. They shall have to register beforehand so that the numbers can be controlled and there is no chaos. It is the largest gathering in the world.

So there have to be many precautions to be taken in the tough Pandamic CORONA times. There may be colour coding of the ghats. This will symbolise the risk of covid on the Ghats. There will be designated routes and pilgrim rest houses.

The devotees will need to follow the assigned gates and resting places according to the passes that they shall receive.

Each person will be given a time slot of 15 minutes only, to control the crowd and allow maximum people to take a holy dip without overcrowding.

There shall be a special focus on the cleanliness of the area. There will be a special garbage disposal technique and the area will be kept as clean as possible so that there is a minimum spread of the disease.

Haridwar Kumbh Mela 2021 Guidelines to be followed?

The central and state government have made preregistration mandatory. All those who wish to visit the Kumbh Mela will need to register.

They will also need to furnish a medical certificate. The registration has to be done with the Uttrakhand government.

The medical certificate has to be obtained from a local community health center or a government medical hospital.

Those devotees coming from abroad will need to take extra precautions. The government is trying to give the vaccine to as many people as possible before the Kumbh Mela, especially those on duty during the Mela.

Haridwar kumbh mela 2021 official website

Please visit the below official website for Haridwar kumbh mela 2021

click here for haridwarkumbhmela2021 website

You can also visit Uttarakhand tourism website – click here

Official Websitehttps://www.haridwarkumbhmela2021.com/

https://uttarakhandtourism.gov.in/

Haridwar kumbh mela 2021 registration portal

You can visit https://www.haridwarkumbhmela2021.com/ and click on registrations or go directly to link – https://dsclservices.org.in/kumbh/

 Haridwar Kumbh Mela 2021 Registration Process

  1. Visit the official website for Haridwar Kumbh Mela 2021 at official website www.haridwarkumbhmela2021.com.
  2. Click on the registration option on the main page.
  3. A registration page will open – fill in all your details like name, age , address, mobile number etc
  4. Recheck the information filled so that there are no errors
  5. Submit the page. You will get the acknowledgement on the mobile number and email address you have provided
  6. Once registration is done you will be able to make the booking,
Haridwar Kumbh Mela 2021

Haridwar Kumbh Mela 2021

Ghats in Haridwar for Snan

Har ki PauriSubhash Ghat
Gau GhatVIP Ghat
Vishnu GhatRam Ghat
Kusha Ghat

Summary:

Kumbh Mela is an auspicious time for all Hindus. The spirit shall remain high and not be reduced by any means. All that is required will be extra care and precautions. All the devotees need to register. The government is taking all the necessary steps, but we request the individual devotees to cooperate.

They must take precautions at a personal level as well. Keep distance and maintain hygiene. Put on a mask for as long as possible.

Do not eat food from the open. Try and maintain a routine and route as suggested by the government to avoid crowding.

Anyone who is planning to go to Kumbh Mela must register beforehand to get the best slot possible. Also, remember to register all the members of your group together so that you may be allotted the same time.

Haridwar Kumbh Mela 2021 FAQ

What is the starting date of Haridwar Kumbh Mela 2021?

The starting date of Haridwar Kumbh Mela is 14 January 2021, which is the day of Makar Sakranti.

How many types of Kumbh Mahotsav are there?

There are 4 types of Kumbh Mela festivals in India. Purna Kumbh Mela (12 years), Ardh Kumbh Mela (06 years), Maha Kumbh (144 years) and Megh Kumbh (Mini Kumbh 01 year).

What are the dates of commencement and completion of Kumbh Mela 2021

This year, Mahakumbh festival will begin from Makar Sankranti on 14 January 2021. Will end on Ramnavami on 27 April 2021

Where will be the Sahi Snan in Haridwar Kumbh 2021?

Sahi Snan will be at Bramhakundm Har ki Paudi Ghar in Haridwar


You may also like – 108 Names of Lord Shiva


 5,081 total views

Varamahalakshmi vrat (Varamahalakshmi vratam)

Varamahalakshmi Vrat – Important festival to worship Ma Lakshmi

Mahalakshmi or Ma Lakshmi is the goddess of good fortune i.e health, wealth and prosperity. She is worshipped for a good health, as well as for the husband’s health and long life. Varamahalakshmi festival is an important festival to celebrate Ma Lakshmi. Today let us know more about Varamahalakshmi festival and Varamahalakshmi vrat (Varamahalakshmi vratam).

Varamahalakshmi vrat ( Varalakshmi Vratam ) which falls before Shravanamas full moon day  is very important festival for hindu celebrated specifically in south part of India.

This festival is celebrated by married woman. It is said that worshipping Ma Lakshmi today is equivalent to worshipping the Astalakshmi ( 8 forms of Ma Lakshmi)–

  • Goddesses of Wealth(Shri),
  • Goddess Earth(Bhu),
  • Goddess of Learning(Saraswati),
  • Goddess of Love(Priti),
  • Goddess of Fame(Kirti),
  • Goddess of Peace(Shanti),
  • Goddess of Pleasure(Tushti)
  • Goddess of Strength(Pushti).

Varalakshmi Vratam 2020: Date and puja timings

This year , 2020, the Varamahalakshmi vrat (Varamahalakshmi vratam) is being celebrated on Friday, July 31,

Muhurat for Varamahalakshmi Vrat 2020

  • The Simha Lagna puja muhurat will be from 06:59 am to 09:17 am. (Duration of this muhurat being 2 hrs and 17 mins)
  • The Vrishchika Lagna puja muhurat will be from 01:53 pm to 04:11 pm (Duration being 02 hours 19 mins)
  • The Kumbha Lagna puja muhurat will be from 07:57 pm to 09:25 pm (Duration being 01 hour and 27 mins)
  • The Vrishabha Lagna puja muhurat will be from 12:25 am to 02:21 am Aug 01, 2020 ( Duration being 1 hours and 56 mins)

Process of Varamahalakshmi vrat (Varamahalakshmi vratam).

The Varamahalakshmi vratam is as follows.

  • Early in the morning women after taking bath should make a rangoli on the place where the Kalash will be placed.
  • Fill the sacred kalasha with rice and top it with fresh mango leaves a coconut and cloth which is placed on the the top of the kalash to cover the coconut
  • Invoke the goddess by decorating the Kalash with flowers , jewellery, fruits, dry fruits, fresh grains, sweets and other savouries.
  • You can also place coins, or rupee notes or make a garland of notes.

Any auspicious festival should be started with worship to Lord Ganesh . Make a small cone shaped Ganesha using turmeric powder (also called as Manjal pillayar).

Varamahalakshmi vrat (Varamahalakshmi vratam).
https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=12681857

Sothe pooja starts with the beginning of pooja to Lord Ganesha. Then the main worship of Varalakshmi begins. The raksha ( red and orange thread) is worshiped for a second time and tied to the right hand of the woman.

Avahanam and Anga Pooja

Finish Ganesha pooja first and then take some flowers and akshat in hand and chant the Avahanam slokha.

Then offer the flowers and akshat to kalasha and invite Ma Lakshmi to your

Chant below:

Lakshmi Ksheera Samudra Raaja Tanaya
Sree Ranga Dhaameshvari
Daasi Bhootha Samasata Deva Vanithaam
Lokaika Deepankuraam
Sreeman Manda Kataaksha Labdha Vibhava
Brahmendra Gangaadharam
Tvaam Trailokya Kudumbineem
Sarasijam Vande Mukunda Priyaam

After above is done, chant Lakshmi Ashtothram(108) by offering flowers to the kalash.

Lord Narayana, that is Lord Vishnu or Lord Hari , the husband of Lakshmi, an embodiment of Shuddha Sattwa, and the preserver of the world. He is also called the Ashta Lakshmi Padhi ( The 8 forms of Ma Lakshmi )

Adi (Protector) Lakshmi,
Dhana (Wealth) Lakshmi,
Dhanya (Food and Grains) Lakshmi,
Vijaya (Victory) Lakshmi,
Vidhya (Knowledge) Lakshmi,
Santana (Offsprings) Lakshmi,
Dhairya (Bravery and Strength) Lakshmi,
Soubhagya (Sumangali- Long life of husband) Lakshmi.
All becomes the embodiment of an ideal woman.

Legend of Varamahalakshmi vrat (Varamahalakshmi vratam)

The importance of the Varalakshmi Vrat was narrated by Lord Shiva to Ma Parvathi. The mention of which can be found in Skanda Purana. Those who perform this Vrat and Pooja are blessed with Dhana (food), Dhanya (food), Aayu (Long life), Aarogya (health), Aishwarya (wealth), Santanana (progeny) and Soubhagya (long life of husband).

According to the legend, long time ago a lady named Charumath lived in the Maratha kingdom. She was a very pious lady.

She took good care of her family , respected her in-laws, loving and cared for her husband and children. One day she dreamt about Goddess Lakshmi asking her to perform the pooja. She, with the consent of her family, performed this Vrata. She also told about this to other ladies.

She was blessed by Lord Vishnu and Goddess Lakshmi, and with this Vrat, it is said that one can find peace and prosperity in life.

This festival is mostly celebrated in South India and savouries like obattu, kosumbari, puliyogare, huli anna, hesaru bele payasa are made on this festival.

In the evening women visit other houses and exchange sweets and offerings.

How to do simple Varalakshmi Pooja

Many a times people are not very much aware of the detailed process of doing this pooja and may be interested in knowing if the pooja can be done in a simple way.

For doing a simple pooja, light the lamp and keep some neivedyam and do the pooja by chanting Mahalakshmi Ashtothram.

There is no hard and fast rule of performing this pooja. If you pray to goddess from the bottom of your heart you will be blessed. Invoke Ma Lakshmi by chanting Mahalakshmi Ashtothram.

So on this auspicious day, let us all pray to Goddess Vara Mahalakshmi to bless us with peace,health & wealth.


So friends, Goddess Lakshmi is one of the prime goddesses for us Hindus.

There are many temples dedicated to various forms of Ma Lakshmi in India. She is worshipped in different forms and incarnations all over the country.

Goddess Lakshmi is known as the goddess of wealth, people worship her for the wealth and prosperity.

Let is look at some prominent Ma Lakshmi Temples


What are some famous Lakshmi temples in India

Some famous Lakshmi temples in India and seek her blessings.

Shri Ashtalakshmi Temple – #1

One of the most important temples of Ma Lakshmi in India. The temple is dedicated to the Ma Lakshmi, and her eight devine forms ( also called as the Ashtalakshmi ) , the goddess of wealth, namely, offspring, success, prosperity, wealth, courage, bravery, food, and knowledge.

Varamahalakshmi Vrat
https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=28929853

The Ashtalakshmi Kovil temple, lies on the shorelines near the Elliot’s beach, in Chennai, India. The sanctorums are depicted on a multi-tier complex.

Ashtalakshmi Temple is open:
Sun – Sat 9:00 AM – 9:00 PM

Address: elliots beach, 6/21 paindi Amman Kovil, Besant Nagar, Chennai, Tamil Nadu 600090

Doddagaddavalli Lakshmi Devi Temple #2

The Lakshmi Devi temple is located in Doddagaddavalli. ( Doddagaddavalli is a village in Hassan District of Karnataka ). It is located 16 km from the capital , the Hassan city center and lies on the Hassan – Belur highway.

https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=51146744

The Lakshmi Devi temple, was built by the Hoysala Empire King Vishnuvardhana in 1114 C.E. It is a very ancient temple and is of prime important, historically and religiously.

Entry Fee : No entry fee , Timings : 6:00 AM – 8:00 PM

Mahalaxmi Temple in Mumbai – #3

One of the most popular pilgrimage places in Mumbai and attracts pilgrims from across the country year round.

Mahalaxmi Temple is one of the most famous temple in Mumbai. It is located on the northern foot of Malabar Hills at Bhulabhai Desai Road in Breach Candy. The temple is dedicated to three dieties Laxmi, Kali and saraswati.

But the presiding deity here is Goddes Laxmi, the Goddess of Wealth. Everyday a large number of devotees visit this temple with lots of expectations. They believe that the Ma Mahalaxmi will take care of them and fulfills their wishes.

Varamahalakshmi Vrat - Mahalakshmi temple Mumbai

The temple is also famous for being one of the six places of the Shakti, where according to Hindu mythology, one can get achieve fulfilment from desire as well as salvation from it.

Navratri’ festival is a special and is celebrated in a big way in the Mahalakshmi temple. During these nine days the temple decorated with lighting and flowers.

A lesser known legend about this temple is that the idol of Ma Lakshmi is a ‘swayambhu‘ – that is one who has not been carved out but has appeared on stone by herself. The only way we can get a glimpse of her is to visit the temple around 9:30pm. During this time the original idols are open for darshan for about 15 to 20 minutes before the temple closes. The temple opens again at 6:00 am, directly with the morning abhisekham , after which the idols are covered and opens again forthe first Aarti. The original idol, being a ‘swayambhu’, is not carved, but an imprint on stone, and is covered with sindoor.

The temple is 1 km from Mahalakshmi railway station in Mumbai. There are two more temples, Tryambakeshwar temple and Mahadev dhakleshwar temple nearby which you can visit as well.

Temple Address:
Bhulabhai Desai Road,
Mumbai-400 026.Contact : 022-2351 4732.
Website: www.mahalakshmi-temple.com
Timing: 06:00 A.M – 10:00 P.M

Please note that photography is strictly prohibited in the temple premises.

One of the very famous temples of Mumbai this temple is very crowded on Friday, Tuesday and Wednesday.

Lakshmi Narayan Temple (Birla Mandir), Delhi – #4

The Laxminarayan Temple, also known as the Birla Mandir is dedicated to Laxminarayan. Based in Delhi, it is one of the most visited temples there.

Varamahalakshmi Vrat - Lakshinarayan Temple Delhi
https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=49129140

Laxminarayan refers to Vishnu, the preserver and is also known as Narayan. When he is with his consort Lakshmi, he is referred to as Shri LaxmiNarayan.

Address: Mandir Marg, near Gole Market, Gole Market, New Delhi, Delhi 110001

Golden Temple Vellore – #5

Dedicated to Lord Vishnu and Ma Lakshmi, this temple complex is inside the Sripuram spiritual park, situated at the foot of a small range of green hills at Thirumalaikodi Vellore in Tamil Nadu, India.

Golden temple vellore
https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=6345344

This temple is

  • 120 km from Tirupati,
  • 145 km from Chennai,
  • 160 km from Puducherry
  • 200 km from Bangalore.

Address: Sri Narayani Peedam, Thirumalaikodi, Vellore, Tamil Nadu 632055


Friends, hope you liked this information. In case you have any comments or feedback, do write back to us.

You may also like – Akshay Patra


 868 total views

error: Content is protected !!