Navratri Day 9 – Ma Siddhidatri – माँ का नौवां स्वरुप – माँ सिद्धिदात्री

Navratri Day 9 is dedicated to Ma Siddhidatri.

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

Navratri Day 9 -  Ma Siddhidatri

चैत्र नवरात्रि से हिंदू नववर्ष का भी प्रारंभ होता है, इसलिए चैत्र नवरात्रि से नवशुरुआत भी माना जाता है। इस नवरात्रि का अंत राम नवमी पर होता है, जिस दिन मर्यादा पुरषोत्तम श्री राम का जन्म दिवस माना जाता है

Hindu New Year begins with Chaitra Navaratri, hence Navratri is also considered to be start of new year and new begining. The end of this Navratri ends on Rama Navami, the day which is considered to be the day on which Maryada Purushottam Lord, Shri Ram was born !

चैत्र नवरात्रि के आखिरी दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाएगी। पुराणों की अनुसार माता सिद्धिदात्री की उपासना स्वयं देवों के देव महादेव शिव भी करते हैं।

On the last day of Chaitra Navratri, Mata Siddhidatri, the ninth form of Maa Durga, is worshiped. According to the Puranas, Goddess Siddhidatri is also worshiped by Lord Shiva, the Lord of Gods himself.

माता आदि- शक्ति , सर्वोच्च देवी, भगवती शिव के बाएं आधे भाग से सिद्धिदात्री के रूप में प्रकट हुईं। माता सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियाँ प्रदान करती हैं।

यहां तक ​​कि भगवान शिव ने भी माता सिद्धिदात्री की मदद से अपने सभी सिद्धियों को प्राप्त किया था। माता सिद्धिदात्री की पूजा केवल मनुष्य ही नहीं बल्कि देव, गंधर्व, असुर, यक्ष और सिद्ध भी करते हैं।

जब माता सिद्धिदात्री शिव के बाएं आधे भाग से प्रकट हुईं, तब भगवान शिव का नाम अर्ध नारीश्वर पड़ा।

माता सिद्धिदात्री कमल के आसन पर विराजमान हैं।मार्कण्डेय पुराण के अनुसार सिद्धियाँ आठ प्रकार की मानी गयी हैं माँ के इस सवरुप की पूजा के साथ ही नौ दिन के नवरात्र के आ नुष्ठान की समाप्ति होती है

Ma Siddhidatri – माता सिद्धिदात्री का रूप 

माता सिद्धिदात्री कमल पुष्प पर विराजमान है और चार भुजा धारी वाली माँ ने लाल वस्त्र धारण किए हुए हैं।

इनके हाथों में सुदर्शन चक्र, शंख, गदा और कमलपुष्प रहता है। इनके सिर पर बड़ा और ऊंचा सा स्वर्ण मुकूट और मुख पैर मंद मंद सी मुस्कान एकक अनोखी आभा को दर्शाता है

Ma Siddhidatri की उत्पति से जुड़ी कथा

माँ दुर्गा प्रतिपदा से लेकर नवमी तिथि तक दानवो का नाश करती है जिससे देवताओ के सभी भय दूर हो जाते है अतः नौवे दिन माँ का स्वरूप दानवो के अंत के बाद अपने भक्तो के मनरत सिद्ध करने के लिए है।

माँ को आदि शक्ति कहा जाता है

मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए रोजाना पुष्प अर्पित करें। उन्हें लाल रंग के पुष्प बहुत पसंद हैं।

Ma Siddhidatri के बाएं हाथ में शंख और अस्त्र-शास्त्र हैं तो दाहिने दाहिने हाथ में गदा और चक्र हैं ।

सवारी / बाहन: शेर.बैंगनी रंग

Ma Siddhidatri पूजा विधि

नाहा धो करके साफ सुथरे वस्त्र धरण करना चाहिए , उसके बाद चौकी पे गंगाजल से शुद्ध करके मां की तस्वीर या मूर्ति रखें। 

माँ को लाल रंग की चुनरी अर्पित करें !

रोली।चावल कुमकुम केसर से तिलक और अन्य श्रंगार करे

  • इस दिन दुर्गासप्तशती के नवें अध्याय से माता का पूजन करें। 
  • इसके बाद मां की आरती और हवन करना चाहिए। 
  • हवन करते समय व्यक्ति को सभी देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए। 
  • इस दिन देवी सहित उनके वाहन, सायुज अर्थार्त अस्त्र, शस्त्र, योगनियों एवं अन्य देवी देवताओं के नाम से हवन करना चाहिए।

पूजा के दौरान मां के बीज मंत्र का 108 बार जाप करें। 

भगवान शंकर और ब्रह्मा जी की पूजा करें फिर मां की अराधना करें। 
माता सिद्धिदात्री को मिष्ठान और फल का प्रसाद चढ़ाएं। 

फिर माता सिद्धिदात्री का नाम लेना चाहिए और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद ले।

माँ की स्तुति करने वाले मनुष्यो का निरवान चक्र जागृत होता है। माँ अपने भक्तो के कार्य सुगम और सरल करती है। वह सारे सुखो को भोग कर अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है

मां सिद्धिदात्री की आरती/Maa Siddhidatri Ki Aarti

जय सिद्धिदात्री मां, तू सिद्धि की दाता।

तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता।

तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि।

तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।

कठिन काम सिद्ध करती हो तुम।

जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम।

तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है।

तू जगदम्बे दाती तू सर्व सिद्धि है।

रविवार को तेरा सुमिरन करे जो।

तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो।

तू सब काज उसके करती है पूरे।

कभी काम उसके रहे ना अधूरे।

तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया।

रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया।

सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली।

जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली।

हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा।

महा नंदा मंदिर में है वास तेरा।

मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता।

भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता।


|| जय माता की ||

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